Summary
पंजाबी व हिंदी भाषा की सशक्त लेखिका व कवियत्री अमृता प्रीतम की आत्मकथा पाठक व श्रोता को उस दुनिया में विचरण कराती है जहाँ सपनों का काल्पनिक संसार मूर्त रूप में घटित होता है। उनका ये संसार किसी को बंधक नहीं बनाता बल्कि विश्वास की डोर थाम कर मुक्ति का मार्ग दिखाता है। अंतरात्मा के लिए ये मुक्ति जितनी सहज और सरल है उतनी कठिन भी है ,जितनी सामाजिक है उतनी असामाजिक भी है ,ऊपर से जितनी शांत है अंदर से उतनी उथल- पुथल भरी है। –सुखनंदन बिंद्रा
परछाईयों को पकड़ने वालो !
छाती में जलती हुई आग की
परछाई नहीं होती
——-अमृता