स्वकथा-“रसीदी टिकट”भाग-4(“Rasidi Ticket”,Amrita pritam’s biography epi-4)

Summary

ख़ुदा की जिस साज़िश ने यह सोलहवां वर्ष किसी अप्सरा की तरह भेज कर मेरे बचपन की समाधि भंग की थी, उस साज़िश की मैं ऋणी हूँ,क्योंकि उस साज़िश का संबंध केवल एक वर्ष से नहीं था, मेरी सारी उम्र से है।—-अमृता प्रीतम,{रसीदी टिकट,—पाठ-6 ,सोलहवाँ साल

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