स्वकथा – “रसीदी टिकट” — भाग 11 ( “Rasidi Ticket” Amrita pritam’s biography part- 11)

Summary

एक सपना और था जिसने मेरी उठती जवानी को अपने  धागों में लपेट लिया था। हर तीसरी या  चौथी रात देखती थी कोइ दो मंज़िला मकान  है, वो बिलकुल अकेला ,आसपास कोइ बस्ती नहीं ,चारो ओर जंगल है और जहाँ वो मकान है उसके एक तरफ नदी बहती है…… नदी की ओर  उस मकान की दूसरी मंज़िल की एक खिड़की  खुलती है। जहाँ कोई  खड़ा खिड़की से बाहर  जंगल के पेड़ों व  नदी को देख रहा है। मुझे सिर्फ़  उसकी पीठ दिखाई देती थी ,और सिर्फ इतना … की गर्म  चादर उसके कन्धों से लिपटी होती थी … 

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स्वकथा –“रसीदी टिकट” भाग -10 (Amrita Pritam’s biography epi-10)

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महारानी एलिज़ाबेथ जिस युवक से मन ही मन प्यार करती हैं  ,उसे जब समुद्री जहाज़ देकर काम सौंपती हैं ,तो दूरबीन लगाकर जाते हुए जहाज़ को देखकर परेशान हो जाती हैं । देखती हैं  कि  नौजवान प्रेमिका भी जहाज़ पर उसके साथ है। वे दोनों डैक पर खड़े हैं ,उस समय महारानी को परेशान देखकर उसका एक शुभचिंतक कहता है ,’मैडम ! लुक ए बिट हायर !’ 

ऊपर ,उस नवयुवक और उसकी प्रेमिका के सिरों से ऊपर ,महारानी के राज्य का झंडा लहरा रहा था। 

मिल गयी थी इसमें एक बूँद तेरे इश्क़ की ,इसलिए मैंने उम्र की सारी कड़वाहट पी ली ,पर आज इस महफ़िल में बैठे हुए मुझे लग रहा है की मेरी उम्र के प्याले में इंसानी प्यार की बहुत सी बूंदे मिल गयी हैं ,और उम्र का प्याला मीठा हो गया है। ‘

—— अमृता प्रीतम ,रसीदी टिकट 

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“वह लड़की” –सआदत हसन मंटो लिखित उर्दू कहानी

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लड़की का चेहरा और ज़्यादा सांवला हो गया,”तुम क्या चाहते हो ?”

सुरेंद्र ने थोड़ी देर अपने दिल को टटोला,”मैं क्या चाहता हूँ  मैं कुछ नहीं चाहता, मैं घर में अकेला हूँ ,अगर तुम मेरे साथ चलोगी तो बड़ी मेहरबानी होगी “

लड़की के गहरे सांवले होठों पर अजीब-ओ-गरीब किस्म की मुस्कराहट नुमूदार हुई ,”मेहरबानी … काहे की मेहरबानी … चलो !” 

और दोनों चल दिए। 

 उर्दू के अग्रणी लेखकों में से एक सआदत हसन मंटो लिखित कहानी “वह लड़की”   विभाजन की उस  त्रासदी से छलके दर्द  की परिणति है,जब  धर्म के आधार पर आंदोलन  भड़के और भारत दो भागों में बंट गया ।

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स्वकथा-“रसीदी टिकट”भाग-4(“Rasidi Ticket”,Amrita pritam’s biography epi-4)

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ख़ुदा की जिस साज़िश ने यह सोलहवां वर्ष किसी अप्सरा की तरह भेज कर मेरे बचपन की समाधि भंग की थी, उस साज़िश की मैं ऋणी हूँ,क्योंकि उस साज़िश का संबंध केवल एक वर्ष से नहीं था, मेरी सारी उम्र से है।—-अमृता प्रीतम,{रसीदी टिकट,—पाठ-6 ,सोलहवाँ साल

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स्वाकथा-रसीदी टिकट ( Rasidi Ticket – Amrita Pritam’s biography)

Summary

 पंजाबी व  हिंदी भाषा की सशक्त  लेखिका  व कवियत्री अमृता प्रीतम की आत्मकथा पाठक व श्रोता को उस दुनिया में विचरण कराती है जहाँ सपनों का काल्पनिक संसार मूर्त रूप में घटित होता है। उनका  ये संसार किसी को बंधक नहीं बनाता बल्कि विश्वास की डोर थाम कर  मुक्ति का मार्ग दिखाता है। अंतरात्मा के लिए ये मुक्ति जितनी सहज और सरल है उतनी कठिन  भी है ,जितनी सामाजिक है उतनी असामाजिक भी है ,ऊपर से जितनी  शांत है अंदर से उतनी उथल- पुथल भरी  है। –सुखनंदन बिंद्रा 

परछाईयों को पकड़ने वालो !

छाती में जलती हुई आग की 

परछाई नहीं होती  

               ——-अमृता 

           

खोल दो बंद दरवाज़ा–जयंती रंगनाथन लिखित कहानी(Khol do band darwaza..story by Jayanti rangnathan)

Summary

महानगरीय जीवन के आपाधापी भरे जीवन के बीच मानवीय संवेदनाओं के स्पंदन की कहानी है “खोल दो बंद दरवाज़ा” मशहूर पत्रकार व लेखिका जयंती रंगनाथन द्वारा लिखित ये कहानी हृदय के गुबार को चीर कर मन के दरवाजों को खोलने व उन्मुक्त उड़ान का संदेश देती है।

खोल दो ! सआदत हसन मंटो लिखित कहानी(“KHOL DO”Story by Saadat Hasan Manto)

Summary

1947 में देश का बंटवारा हुआ। लाखों लोग लापता हुए,अपनो से बिछुड़े, और मारे गए। इस त्रासदी को मंटो ने नज़दीक से देखा।मार काट देखी,आम आदमी को शैतान बनते देखा। इस त्रासदी की विडंबना रही के रक्षक ही भक्षक बने। इसी बिंदु को केन्द्र में रख कर लिखी गयी कहानी है “खोल दो”।विभाजन के वक़्त अपने पिता से बिछुड़ी 17 वर्ष की खूसूरत लड़की सकीना को जनता के मददगार कहे जाने वाले स्वयंसेवक ढूंढ तो लेते है लेकिन सकीना अपने पिता के पास नहीं पहुंचाई जाती। जबकि पिता सिराजुद्दीन से स्वयंसेवकों बे वायदा किया होता है कि उसकी बेटी अगर ज़िंदा बची होगी उस तक ज़रूर पहुंच जाएगी। सिराजुद्दीन को जब मरणासन्न सकीना मिलती है तो वो कहता है कि मेरी बेटी ज़िंदा है ,जब कि सकीना का इलाज़ कर रहा डॉक्टर लाश बन चुकी सकीना की हालत समझ कर पसीना-पसीना हो जाता है।क्या हुआ सकीना के साथ ??????? सुनिये झकझोर देने वाली कहानी “खोल दो”

धन्नों–अमृता प्रीतम लिखित कहानी( Dhanno-story by Amrita preetam

Summary

अमृता प्रीतम लिखित “धन्नों”समाज में अपने दम पर अकेली जीने वाली उस औरत की कहानी है जिसका हथियार उसकी ज़ुबान है।अपनी ज़ुबान से समाज का सच उधेड़ कर नंगा कर देने वाली धन्नों अपने जीवन के अंत में एक बेहतरीन और अनुकरणीय मिसाल समाज के सामने रख जाती है। क्या थी वो मिसाल ? जानने के लिए सुनिए कहानी “धन्नों”

नीचे के कपड़े(Neeche ke kapde)Story by Amrita preetam

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“नीचे के कपड़े” अमृता प्रीतम की दस प्रतिनिधि कहानियों में शुमार है।ये कहानी मन और बदन ,पूरे और अधूरे, उजागर और छिपे रिश्तों को बयां करती है। खानाबदोश औरतों की रवायत है कि वे अपनी कमर पर पड़ी नेफे की लकीर पर उसका नाम गुदवाती हैं जिस से वे मोहब्बत करती हैं। सिवाय ईश्वर की आंख के कोई भी किसी औरत का कमर से नीचे का बदन नहीं देख सकता। इस कहानी के पात्र अक्षय को घर के स्टोर में पड़े पुराने खतों के ज़रिए पारिवारिक रिश्तों की उलझी हुई सच्चाई का पता चलता है । जहां उसके पिता का संबंध किसी मिसेज़ चोपड़ा से है,और स्वयं अक्षय अपनी माँ और चाचा के बीच पनपे संबंध की परिणति है। माँ को संदेह है कि चाचा का संबंध मिस नंदा से है।पुराने खतों से उघड़े राज़ जान कर अक्षय को महसूस होता है कि उसे ईश्वर की आंख मिल गयी है और उसने कपड़ों के नीचे सब के नेफे की लकीर को देख लिया है।

लटिया की छोकरी (epi-2)Latiya ki chhokri(part-2)

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लटिया की छोकरी अमृता प्रीतम की दस प्रतिनिधि कहानियों में से एक है।ये कहानी निडर और साहसी आदिवासी लड़की चारु के अंतर्व्यथा और प्रतिशोध के अभिव्यक्ति है।ये कहानी दो भागों में upload की गई है।ये लटिया की छोकरी का दूसरा भाग है।पहला भाग सुनने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर जाएं।https://anchor.fm/sukhnandan-bindra/episodes/epi-1Latiya-ki-chhokripart-1-eu53g6